शब्दार्थ
पार
paar
hiadverb / postposition
अर्थ
आर-पार, दूसरी तरफ़, आरपार निकल जाना।
विस्तार
उर्दू शायरी में 'पार' का प्रयोग प्रायः किसी वस्तु के आर-पार निकल जाने या दूसरी ओर पहुँचने के संदर्भ में होता है। प्रस्तुत शे'र में 'जिगर के पार हो' से अभिप्राय महबूब के तीर का जिगर को पूरी तरह भेद कर निकल जाना है। यह आशिक़ की उस चाहत को दर्शाता है जिसमें वह महबूब के तीरंदाज़ी के हुनर को परखने के लिए गहरे से गहरा ज़ख़्म सहना चाहता है।
व्युत्पत्ति
Sanskrit 'पार' (pāra, meaning opposite bank, limit, or end), retained in Hindustani.
प्रयोग
In the ghazal, it is a staple motif either for river-crossings of love or for arrows piercing the lover's heart or liver completely.
उदाहरण
तीर जिगर के पार उतर गया।
कश्ती को दरिया के पार पहुँचा दो।
समानार्थी
आर-पारउस पारदूर
संबंधित शब्द
आर-पारपार होनापार करनापारावार
