शब्दार्थ

पिंदार

pindār

hinoun

अर्थ

घमंड, अहंकार, गर्व या आत्म-भ्रम।

विस्तार

शास्त्रीय शायरी में 'पिंदार' का अर्थ आत्म-अभिमान, अहंकार या झूठा दंभ होता है। प्रस्तुत शे'र में ग़ालिब ने इसे एक 'सनम-कदा' (बुतख़ाना) कहा है जिसे वीरान करके ही आशिक़ रुसवाई की राह पर आगे बढ़ता है। यह इश्क़ की राह में बाधा बनने वाली 'ख़ुदी' या अहंकार का प्रतीक है।

व्युत्पत्ति

Persian, derived from the verb pindāshtan (to suppose, think, or consider).

प्रयोग

In the ghazal tradition, pindār is often contrasted with love and portrayed as an obstacle that must be shattered like fragile glass or demolished like a pagan idol.

उदाहरण

पिंदार-ए-ख़ुदी को मिटाना

शीशा-ए-पिंदार का टूटना

समानार्थी

तकब्बुरग़ुरूरघमंडकब्र

संबंधित शब्द

ख़ुदीगुमानअनावह्म
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