शब्दार्थ
पंद-गोयों
pand-goyon
अर्थ
सलाहकारों, नसीहत देने वालों (बहुवचन रूप)।
विस्तार
शास्त्रीय शायरी में 'पंद-गो' का अर्थ नसीहत देने वाले या उपदेशक से है जो आशिक़ को होश में लाने की कोशिश करता है। प्रस्तुत शेर में 'पंद-गोयों' (बहुवचन) उन सलाहकारों के लिए आया है जिन्होंने प्रेमी के चाक गिरेबाँ को सीने यानी उसके पागलपन को सँभालने की तमाम तदबीरें कीं। उनकी सारी युक्तियों के बावजूद आशिक़ की दीवानगी काबू में नहीं आई।
व्युत्पत्ति
Persian: 'pand' (پند, counsel/advice) + 'gūy' (گوی, speaker/sayer, from 'guftan'), with the Hindustani oblique plural suffix '-oñ' (وں).
प्रयोग
In the ghazal tradition, the 'pand-go' or 'nāsih' serves as a conventional antagonist whose cold, rational advice is mockingly rejected by the passionate lover.
उदाहरण
पंद-गोयों की बातें दिल के ज़ख़्म नहीं भर सकतीं।
सुन न ऐ दिल पंद-गोयों का कहा कभी।
