शब्दार्थ

पाज़ंद

pāzand

hinoun

अर्थ

पारसियों का धार्मिक भाष्य; भ्रामक या जटिल व्याख्या।

विस्तार

ऐतिहासिक रूप से 'पाज़ंद' पारसी धर्म का वह भाष्य है जो 'ज़ंद' (अवेस्ता की व्याख्या) को स्पष्ट करने के लिए लिखा गया था। उर्दू और फ़ारसी शायरी में यह शब्द अक्सर ऐसी मनमानी, जटिल या भ्रामक व्याख्याओं के लिए प्रयुक्त होता है जो मूल सत्य को विकृत कर दें। प्रस्तुत शे'र में इसका आशय यह है कि व्याख्याकार अपनी तावीलों से पवित्र क़ुरआन के सरल सत्य को भी गूढ़ और गुमराह करने वाला बना देते हैं।

व्युत्पत्ति

Middle Persian (Pāzand), from ancient Iranian roots akin to 'paiti-zanti' (re-explanation or secondary commentary).

प्रयोग

Frequently paired with 'Zend' (in the phrase 'Zend-o-Pazand') in classical verse to signify either Zoroastrian lore or deceptive theological speculation.

उदाहरण

ज़ंद ओ पाज़ंद के फलसफे में उलझा हुआ ज़ेहन

तावील-ए-मुफ़स्सिर ने साफ़ कलाम को पाज़ंद बना दिया

समानार्थी

ज़ंदशरहभाष्य

संबंधित शब्द

तफ़्सीरतावीलमुफ़स्सिरअवेस्ता
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