शब्दार्थ
पोच-बाफ़ी
poch-bāfī
hinoun, feminine
अर्थ
व्यर्थ, घटिया या निरर्थक शायरी अथवा बातचीत गढ़ना।
विस्तार
'पोच-बाफ़ी' का शाब्दिक अर्थ घटिया या कच्चा ताना-बाना बुनना है, जिसका लाक्षणिक प्रयोग निरर्थक और सतही शायरी गढ़ने के लिए किया जाता है। प्रस्तुत शेर में शायर समकालीन कवियों पर तंज करते हुए कहता है कि उनकी रचनाओं में कोई दार्शनिक गहराई नहीं है, बल्कि वे महज़ बेतुकी बातें बुनते हैं।
व्युत्पत्ति
Persian compound formed from 'poch' (hollow, absurd, worthless) and 'bāfī' (weaving, fabric-making, from the verb 'bāftan').
प्रयोग
Commonly employed in classical literary polemics and satirical verses to mock inferior poets who lack intellectual depth.
उदाहरण
छोड़ो यह पोच-बाफ़ी और कोई मानी-ख़ेज़ बात करो।
फ़िक्र के बिना यह उम्दा बहर भी महज़ पोच-बाफ़ी है।
समानार्थी
बेहूदा-गोईमुहमल-गोईलफ़्फ़ाज़ी
संबंधित शब्द
पोचबाफ़िंदाजुलाहातह
