शब्दार्थ
पाक-बाज़
paak-baaz
अर्थ
पवित्र, निष्कपट, सदाचारी या सच्चा साधक।
विस्तार
उर्दू शायरी में 'पाक-बाज़' का आशय उस साधक या प्रेमी से है जो कपट और सांसारिक लोभ से पूरी तरह मुक्त हो। इस शे'र में यह उन स्वाभिमानी और निष्कपट मस्तों (रिंदों) की विशेषता बताता है जो अपनी रूहानी पवित्रता को किसी विदेशी सत्ता या साक़ी के आगे हाथ फैलाकर दूषित नहीं करते।
व्युत्पत्ति
Persian compound formed from 'pāk' (pure, clean) and the agentive suffix/stem '-bāz' (from bāzīdan/bākhtan, to play or deal), literally meaning one who plays fairly or deals with purity.
प्रयोग
In the ghazal tradition, it is frequently used to invert orthodox values, portraying the non-conformist drunkard (rind) as far more genuinely pure than the hypocritical ascetic (zahid).
उदाहरण
इश्क़ के मयख़ाने में सिर्फ़ पाक-बाज़ रिंदों का क़दम पड़ता है।
उसकी पाक-बाज़ नीयत पर किसी को भी शुबहा न था।
