शब्दार्थ
नईं
na'īñ
hiparticle
अर्थ
नहीं; निषेध या अस्वीकृति का सूचक शब्द।
विस्तार
यह शब्द मानक 'नहीं' का पुरातन और दकनी रूप है जो प्रारंभिक रेख़्ता शायरी में खूब मिलता है। इस शे'र में यह निषेधवाचक अर्थ ('क़द्र नहीं करता') में प्रयुक्त हुआ है। प्राचीन शायर बहर के वज़न को साधने के लिए अक्सर 'नहीं' की जगह 'नईं' का प्रयोग करते थे।
व्युत्पत्ति
From Sanskrit 'न हि' (na hi), evolving through Prakrit and Apabhramsha into Dakkani and Hindustani variants.
प्रयोग
Commonly encountered in classical Rekhta as a metrical alternative to standard 'nahīn' to preserve poetic cadence.
उदाहरण
दिल में अब कोई तमन्ना ही नईं
तुझ बिन हमारा कोई दरमाँ नईं
समानार्थी
नहींनान
संबंधित शब्द
इन्कारनफ़ीबे-क़द्री
