शब्दार्थ
ना-समझ
nā-samajh
hiadjective
अर्थ
नादान, नासमझ, समझ रहित या अल्पबुद्धि।
विस्तार
उर्दू शायरी में 'ना-समझ' का आशय उस नादान या कम-फ़हम व्यक्ति से है जो जज़्बातों की सच्चाई को समझ नहीं पाता। इस शे'र में यह शब्द उस महबूब के लिए उलाहने के तौर पर आया है, जो अपने सच्चे मुख़्लिस (शुभचिंतक) से बिना किसी सबब के नाराज़ हो जाता है।
व्युत्पत्ति
Hybrid compound of Persian negative prefix 'nā-' (ना-) and Indic/Sanskrit-derived verbal noun 'samajh' (समझ).
प्रयोग
In ghazals, the term is frequently used in a tone of tender complaint to excuse the beloved's indifference or rash displeasure.
उदाहरण
ना-समझ दिल ने मोहब्बत का भरम तोड़ दिया
ऐ ना-समझ, अपनों से यूँ बे-रुख़ी अच्छी नहीं
समानार्थी
नादानकम-फ़हमबे-वक़ूफ़बे-समझ
संबंधित शब्द
ना-समझीसमझसमझदार
