शब्दार्थ

ना-सुबूरी

nā-subūrī

hinoun

अर्थ

अधीरता, बेकरारी, सब्र या धैर्य का अभाव।

विस्तार

उर्दू शायरी में 'ना-सुबूरी' से आशय अधीरता, बेताबी और सब्र के अभाव से है, जो आशिक़ के दिल का स्वाभाविक लक्षण है। प्रस्तुत शे'र में ना-सुबूरी को दिल की ज़िंदगी क़रार दिया गया है, यानी जिस दिल में तड़प और बेकरारी न हो, वह वास्तव में जीवित ही नहीं है। यहाँ यह शब्द प्रेम की जीवंतता और सच्ची लगन का प्रतीक बनकर आया है।

व्युत्पत्ति

Persian-Arabic compound: Persian negative prefix 'nā-' combined with Arabic 'ṣubūr' (patient/long-suffering) and the Persian abstract noun suffix '-ī'.

प्रयोग

In classical ghazal, it is frequently invoked to celebrate the lover's involuntary longing and restless passion over passive restraint.

उदाहरण

हिज्र की रात में दिल की ना-सुबूरी

इश्क़ में ना-सुबूरी ही आशिक़ का सुकून है

समानार्थी

बे-क़रारीबे-सब्रीइज़्तिराबबे-ताबी

संबंधित शब्द

ना-सुबूरसब्रसुबूरबे-सब्री
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