शब्दार्थ

निसाब

nisaab

hinoun

अर्थ

निर्धारित मात्रा, पूंजी, ज़कात के लिए तयशुदा धन

विस्तार

इस्लामी विधिक संदर्भ में 'निसाब' धन की वह न्यूनतम मात्रा है जिस पर ज़कात अनिवार्य होती है। शायरी में इसका प्रयोग सांसारिक धन-दौलत, पूँजी और भौतिक वैभव के संचय के अर्थ में रूपक के तौर पर होता है। प्रस्तुत शेर में 'निसाब-ए-ज़र-ओ-सीम' से तात्पर्य सोने-चाँदी के संचित खज़ाने और भौतिक संपत्ति से है, जिससे दरवेश बेपरवाह रहता है।

व्युत्पत्ति

Arabic (ن ص ب / n-s-b), related to establishing, fixing, or setting up a standard or quota.

प्रयोग

In classical Urdu poetry, especially in Iqbal's philosophical verses, it frequently symbolizes material wealth in contrast with spiritual contentment and asceticism.

उदाहरण

निसाब-ए-ज़र-ओ-सीम की हवस दरवेश को नहीं होती।

फ़क़ीरी के आगे दुनियावी निसाब की कोई क़ीमत नहीं।

समानार्थी

पूँजीपैमानामीज़ानज़ख़ीरा

संबंधित शब्द

ज़कातसरमायाज़र-ओ-सीमदौलत
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