शब्दार्थ
नीस्ताँ-आलम
neestaan-aalam
hiसंज्ञा (पुल्लिंग)
अर्थ
सरकंडों या नरकटों की पूरी दुनिया या विशाल वन।
विस्तार
शास्त्रीय काव्य में यह सामासिक पद सरकंडों के एक विशाल संसार को दर्शाता है, जो विलाप और नाद का स्रोत है। ग़ालिब के शेर में यह दरवेशी के बोरीए (नरकट की चटाई) के संदर्भ में आया है, जिसका ताना-बाना नरकट के पूरे वन की तरह गूँज और शोहरत रखता है। यह भौतिक अभाव के बावजूद आध्यात्मिक और कलात्मक बुलंदी का प्रतीक है।
व्युत्पत्ति
फारसी 'नीस्ताँ' (नरकट/सरकंडों का स्थान) और अरबी 'आलम' (संसार/जगत) का समास।
प्रयोग
ग़ज़ल में यह शब्द अक्सर फ़क़ीरी, आंतरिक क्रंदन और बाँसुरी के रूपक के रूप में प्रयुक्त होता है।
उदाहरण
यक नीस्ताँ-आलम सदा का ख़ामोशी में पिहाँ होना
बोरीए के हर रेशे में है नीस्ताँ-आलम बपा
समानार्थी
नीजिस्ताननेज़ारआलम-ए-ने
संबंधित शब्द
बोरियानेबे-नवाईआवाज़ा
