शब्दार्थ

नारा

na'ra

hinoun

अर्थ

ऊँची आवाज़, पुकार, चीख़ या मस्ताना जयघोष।

विस्तार

शास्त्रीय और सूफ़ी शायरी में 'नारा' रूहानी मस्ती या इश्क़ के आलम में दिल से निकली बुलंद पुकार को कहते हैं। प्रस्तुत शेर में 'नारा-ए-मस्ताना' सूफ़ी की उस बेख़ुद सदा का प्रतीक है जो काबे और बुतख़ाने के भेद से आज़ाद है। यह औपचारिक धर्म के मुक़ाबले रूहानी दीवानगी और सच्चाई को वरीयता देता है।

व्युत्पत्ति

Arabic (نَعْرَة / na‘rah), from the root n-ʿ-r, referring to shouting, screaming, or raising a loud cry.

प्रयोग

In ghazal and Sufi poetry, it is frequently combined as 'na'ra-e-mastāna' or 'na'ra-e-haqq' to evoke divine ecstatic utterances like that of Mansur Hallaj.

उदाहरण

नारा-ए-मस्ताना ने महफ़िल में तहलका मचा दिया।

दश्त-ए-तन्हाई में एक दर्द-भरा नारा गूँज उठा।

समानार्थी

चीख़पुकारफ़रियादगुहार

संबंधित शब्द

मस्तानासदाबाँगहक़
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