शब्दार्थ
ना-महरम
nā-mahram
अर्थ
अजनबी, भेद या रहस्य से अनभिज्ञ, गैर।
विस्तार
शरिया के संदर्भ में 'ना-महरम' वह गैर व्यक्ति है जिससे पर्दा वाजिब हो और जो घर के अंदरूनी दायरे से बाहर समझा जाए। सूफ़ी शायरी में इससे मुराद वह अजनबी या ज़ाहिर-परस्त है जो इश्क़ और रूहानियत के गूढ़ रहस्यों से महरूम रहता है। प्रस्तुत शेर में यह ज़ाहिद (तपस्वी) पर व्यंग्य है, जो काबा (हरम) के भीतर रहकर भी हक़ीक़त से नावाक़िफ़ और बेगाना रहा।
व्युत्पत्ति
Persian negative prefix 'nā-' compounded with Arabic 'maḥram' (confidant or prohibited degrees of kinship, derived from the root ḥ-r-m, meaning sacred or forbidden).
प्रयोग
Poets frequently employ 'na-mahram' in rhetorical wordplay (tajnis) with 'haram' to contrast the ritualistic pretense of the ascetic with genuine inner devotion.
उदाहरण
राज़-ए-उल्फ़त से ना-महरम होना
हरम में रहकर भी ना-महरम रहना
