शब्दार्थ

नाज़-बरदारों

naaz-bardaaroñ

hinoun

अर्थ

माशूक़ के नाज़-नख़रे उठाने वाले; लाड़ सहने वाले प्रेमी।

विस्तार

यह शब्द उन आशिक़ों या मुरीदों के लिए प्रयुक्त होता है जो महबूब के नाज़-नख़रे और अदाओं को ख़ुशी से सिर-आँखों पर रखते हैं। इस शे'र में शायर कहता है कि ख़ाक में मिल जाने से पहले वह भी किसी सर्व-क़द महबूब के लाड़ और नख़रे उठाने वालों में शुमार था। यह शब्द सौंदर्य की सेवा और आशिक़ी की पुरानी रफ़अत को याद दिलाता है।

व्युत्पत्ति

Persian compound formed from 'nāz' (coquetry, amorous grace) and 'bardār' (bearer, tolerator, from the verb 'bardāshtan', to bear or endure).

प्रयोग

A classic ghazal trope used to depict lovers who embrace the beloved's disdain and whimsical cruelty as a badge of honor.

उदाहरण

हम भी थे उसके नाज़-बरदारों में

तेरे नाज़-बरदारों की क़िस्मत में फ़क़त इंतिज़ार है

समानार्थी

नाज़-कशोंआशिक़ोंख़ुशामदियों

संबंधित शब्द

नाज़-बरदारीनाज़-ओ-अंदाज़नाज़-परवरसर्व-ए-रवाँ
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