शब्दार्थ

ना-कसी

nā-kasī

hinoun

अर्थ

नाक़ाबिलियत, निकम्मापन, तुच्छता या किसी काम का न होना।

विस्तार

क्लासिकल शायरी में 'ना-कसी' का तात्पर्य निकम्मेपन, बेहुनरी या किसी दर्जे और लियाक़त के न होने से है। इस शे'र में इसका प्रयोग ज़माने के सितम के सामने अपनी बेबसी और नाअहली के अहसास के लिए हुआ है। शायर अपनी इस तुच्छता पर इतना लज्जित है कि शर्म के मारे ज़मीन में गड़ जाना चाहता है।

व्युत्पत्ति

Persian (compound of negative prefix 'nā' + 'kas' meaning person/somebody + abstract noun suffix 'ī').

प्रयोग

Commonly invoked in the ghazal tradition as a trope of self-effacement, helplessness, and profound modesty before fate or the beloved.

उदाहरण

शर्म-ए-ना-कसी से सर झुका होना

अपनी ना-कसी का रोना

समानार्थी

नाक़ाबिलियतनिकम्मापनतुच्छताबे-क़दरी

संबंधित शब्द

ना-कसबे-कसीना-अहलीकम-माएगी
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