शब्दार्थ
दिए
diye
hinoun, masculine, plural
अर्थ
मिट्टी के चिराग़ या दीपक।
विस्तार
काव्य में 'दिए' शब्द मिट्टी के दीपकों या चिराग़ों के बहुवचन रूप में प्रयुक्त हुआ है। इस शेर में यह आँखों की दृष्टि या जीवन-ज्योति का प्रतीक है जो आँसुओं रूपी तेल के समाप्त होते ही बुझ जाती है। यह रूपक मानव जीवन की नश्वरता और दुख की पराकाष्ठा को व्यक्त करता है।
व्युत्पत्ति
From Sanskrit 'दीप' (dīpa) via Prakrit 'दीअव' (dīava), evolving into Hindi/Urdu 'दिया' (diyā).
प्रयोग
Commonly invoked in the ghazal tradition alongside wind, darkness, or the solitary night of longing to depict vulnerability and vanishing hope.
उदाहरण
शब-ए-फ़ुर्क़त में जलते बुझते दिए
हवा के सामने मिट्टी के दिए
समानार्थी
चिराग़दीपकदीप
संबंधित शब्द
रोग़नबत्तीलौशमा
