शब्दार्थ

थम

tham

hiverb

अर्थ

रुक, ठहर, थम जा (आदेशात्मक रूप)।

विस्तार

शास्त्रीय शायरी में 'थम' क्रिया 'थमना' का आज्ञार्थक रूप है, जिसका अर्थ रुकने या ठहरने की हिदायत देना है। प्रस्तुत शेर में शायर मुसाफ़िर (रह-रौ) को ठहरने के लिए कहता है क्योंकि राह में कोई कठिन मक़ाम या रुकावट आ गई है। यह शब्द सचेत करने और सफ़र को फौरन रोक देने के भाव को व्यक्त करता है।

व्युत्पत्ति

From Sanskrit स्तम्भ् (stambh, meaning 'to stop, fix, restrain') via Prakrit थंभ (thambha).

प्रयोग

In ghazal poetry, it is often addressed as an imperative to flowing tears, a wandering heart, or a traveling lover to pause.

उदाहरण

थम ऐ चश्म-ए-तर ज़रा कि दिल की बात कह लूँ

थम जा ऐ कारवाँ कि आगे राह पुर-ख़तर है

समानार्थी

ठहररुकसाकिन हो

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थमनाथामनाथमाव
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