शब्दार्थ

तल्ख़-नवाई

talkh-nawā'ī

hinoun (feminine)

अर्थ

कड़वी या दर्द-भरी बात, शिकवे भरा आलाप।

विस्तार

यह शब्द 'तल्ख़' (कड़वा) और 'नवाई' (गायन, आवाज़) से मिलकर बना है, जिसका आशय कटु या दर्दनाक बोल है। शायरी में यह तीव्र दुःख के कारण निकली तीखी बातों और शिकवों को व्यक्त करता है। प्रस्तुत शेर में ग़ालिब अत्यधिक हार्दिक पीड़ा के चलते अपने कड़वे लहजे के लिए माफ़ी तलब कर रहे हैं।

व्युत्पत्ति

Persian compound: 'talkh' (bitter) + 'nawā' (voice, tune, song) + abstract suffix '-ī'.

प्रयोग

In the ghazal, poets employ this phrase as a humble justification when their poetic utterance turns sorrowful and caustic under the weight of unendurable suffering.

उदाहरण

तल्ख़-नवाई से दिल का रंज बयां हुआ।

उनकी तल्ख़-नवाई में भी एक गहरा सोज़ था।

समानार्थी

तल्ख़-कलामीशिकवा-संजीनौहा-ख़्वानी

संबंधित शब्द

तल्ख़नवानालासोज़
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