शब्दार्थ

तजाहुल-पेशगी

tajahul-peshgi

hinoun

अर्थ

जान-बूझकर अनजान बनने की आदत या ढोंग।

विस्तार

यह शब्द जान-बूझकर अनभिज्ञ बनने के स्वभाव या आचरण को दर्शाता है। शास्त्रीय शायरी में इसका प्रयोग महबूब के उस नाज़-ओ-अंदाज़ के लिए होता है जिसमें वह सब जानते हुए भी अनजान बनता है। प्रस्तुत शेर में आशिक़ महबूब से इस लगातार बेख़बरी का मक़सद पूछता है।

व्युत्पत्ति

Compound of Arabic 'tajahul' (feigning ignorance) and Persian '-peshgi' (custom, practice, occupation).

प्रयोग

In ghazal poetry, it captures the beloved's alluring yet tormenting affectation of pretending not to understand the lover's passion.

उदाहरण

तजाहुल-पेशगी से क्या हासिल होगा

उनकी तजाहुल-पेशगी ने बेक़रार दिल को तड़पा दिया

समानार्थी

तग़ाफ़ुल-शिआरीअनजानपनबेख़बरी

संबंधित शब्द

तजाहुलतजाहुल-ए-आरिफ़ानातग़ाफ़ुलपेशगी
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