शब्दार्थ
तक़ाज़ा
taqāzā
hinoun (masculine)
अर्थ
माँग, आग्रह, मुतालबा या कर्ज़ की अदायगी का दबाव।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'तक़ाज़ा' किसी अधिकार, माँग या क़र्ज़ की अदायगी के आग्रह को दर्शाता है। प्रस्तुत शे'र में ग़ालिब के दिल का यह निरंतर आग्रह है कि आधी खुली गिरह को पूरी तरह खोलने का संघर्ष जारी रखा जाए। यह शब्द यहाँ आंतरिक बेचैनी और प्रेम के अधूरे काम को पूरा करने के भावनात्मक दबाव को व्यक्त करता है।
व्युत्पत्ति
Arabic (تقاضٍ / تَقَاضَى, from the triconsal root q-ḍ-y meaning to decree, settle, or demand debt).
प्रयोग
In the ghazal, poets frequently personify circumstances, age, or love as demanding creditors making a relentless 'taqāzā' on the lover.
उदाहरण
इश्क़ का तक़ाज़ा सब्र की इजाज़त नहीं देता।
वक़्त का तक़ाज़ा है कि अब क़दम बढ़ाया जाए।
समानार्थी
माँगआग्रहमुतालबाइसरार
संबंधित शब्द
क़र्ज़काविशतलबदस्ती
