शब्दार्थ
तेवरी
tevrī
hinoun
अर्थ
भौंहों का खिंचाव; क्रोध या रोष की शिकन।
विस्तार
उर्दू और हिन्दुस्तानी शायरी में 'तेवरी' का तात्पर्य भौंहों के खिंचाव या माथे की उस शिकन से है जो क्रोध या नाराज़गी में उभरती है। प्रस्तुत शेर में नक़ाब के अंदर महबूब की चढ़ी हुई तेवरी का ज़िक्र है, जिसकी वजह से नक़ाब पर भी सिलवट पड़ गई है। यह शब्द अक्सर नाज़-ओ-अंदाज़ और महबूब के मान या रोष को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है।
व्युत्पत्ति
Derived from Sanskrit 'त्रिकुटी' (trikuṭī) or Prakrit roots signifying the confluence of the eyebrows on the forehead.
प्रयोग
Commonly encountered in the idiom 'tevrī chaṛhnā' to portray the beloved's haughty or coquettish displeasure (nāz-o-itarāb).
उदाहरण
तेवरी पर बल देखकर आशिक़ का दिल दहल गया।
बात ही बात में उनकी तेवरी चढ़ गई।
समानार्थी
भृकुटित्यौरीचीन-ए-जबींबल
संबंधित शब्द
तेवरशिकनमाथानक़ाब
