शब्दार्थ

तारीफ़

ta'rīf

hinoun

अर्थ

प्रशंसा, बड़ाई, गुणगान या किसी चीज़ का विवरण।

विस्तार

शास्त्रीय काव्य में 'तारीफ़' का अर्थ प्रशंसा, बड़ाई अथवा किसी वस्तु के गुणों का वर्णन है। इस शे'र में यह शब्द स्वर्ग (बहिश्त) के उन मशहूर वर्णनों और गुणों की ओर संकेत करता है जो पारंपरिक रूप से सुने जाते हैं। आशिक़ इन तमाम बड़ाईयों को स्वीकारते हुए भी महबूब के जलवे को ही स्वर्ग की असलियत मानता है।

व्युत्पत्ति

Arabic تَعْرِيف (taʿrīf), verbal noun of عَرَّفَ (ʿarrafa, 'to make known, inform, describe').

प्रयोग

Frequently used in ghazals to praise the beloved's charms or to contrast religious praises of paradise with earthly romantic devotion.

उदाहरण

सुनी जो उस हुस्न की तारीफ़

तारीफ़-ए-चमन से जी बहल जाए

समानार्थी

मदहसताइशतौसीफ़सराहाना

संबंधित शब्द

ताआरुफ़आरिफ़मारिफ़त
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