शब्दार्थ
ता'मीर
ta'mīr
hinoun
अर्थ
निर्माण, भवन-निर्माण या किसी चीज़ को बनाना।
विस्तार
शास्त्रीय शायरी में 'ता'मीर' का तात्पर्य केवल भौतिक भवन-निर्माण से ही नहीं, बल्कि किसी चीज़ को संवारने या रचने से भी है। प्रस्तुत शे'र में यह दौलतमंद व्यक्ति द्वारा दुनियावी महल व मकानात बनाने की उस फ़िक्र को दर्शाता है जो ज़िंदगी की नश्वरता को भुला देती है। यह सांसारिक ठाठ-बाट की निरर्थकता को रेखांकित करता है।
व्युत्पत्ति
Arabic verbal noun (ta'mīr) from the root ع-م-ر ('-m-r), denoting inhabiting, prolonging life, or building.
प्रयोग
In the ghazal tradition, 'ta'mīr' is frequently paired in antithesis with 'तख़रीब' (destruction) or 'वीरानी' (ruin) to highlight the transience of human endeavors.
उदाहरण
ता'मीर-ए-आशियाँ की हवस दिल से न गई
दिल की वीरानी पे ता'मीर का धोका न रहे
समानार्थी
निर्माणबनावटरचनासृजन
संबंधित शब्द
मे'मारइमारततख़रीबबुनियाद
