शब्दार्थ
ता-ब-ज़र्रा
tā-ba-zarra
अर्थ
धूल के एक छोटे कण या परमाणु तक।
विस्तार
इस सामासिक पद का अर्थ सूक्ष्मतम कण अथवा धूल के बारीक ज़र्रे तक होना है। प्रस्तुत शेर में यह 'अज़-मेहर' (सूर्य से लेकर) के साथ मिलकर विराट से लेकर क्षुद्रतम तक के संपूर्ण विस्तार को दर्शाता है। इसका भाव यह है कि ब्रह्मांड में सूर्य से लेकर एक छोटे से कण तक, हर चीज़ दर्पण बनकर सत्य या सौंदर्य को प्रतिबिंबित कर रही है।
व्युत्पत्ति
Persian compound formed from 'tā' (up to, until), the preposition 'ba' (to, at), and the Arabic-origin noun 'zarra' (atom, speck, particle).
प्रयोग
In classical Urdu ghazal, this phrase is commonly contrasted with sublime entities like the sun ('mehr') to express a cosmic, all-encompassing scale from the grandest to the humblest.
उदाहरण
अज़-मेहर ता-ब-ज़र्रा नूर ही नूर है
ता-ब-ज़र्रा सब पे मुहीत है उसका जल्वा
