शब्दार्थ
तुनुक-बख़्शी
tunuk-bakhshī
hinoun
अर्थ
अल्प दान, कंजूसी, नाकाफ़ी या थोड़ा देने का भाव।
विस्तार
यह सामासिक पद अत्यंत सीमित अथवा कृपणतापूर्ण दान को दर्शाता है। शेर में इसका प्रयोग 'अब्र-ए-नैसाँ' (बसंत के मेघ) की ओस जैसी सूक्ष्म व अल्प अता पर खेद जताने के लिए हुआ है, जो पर्वतीय लाला के प्यासे प्यालों को भरने में असमर्थ है।
व्युत्पत्ति
Persian compound formed from 'tunuk' (slight, delicate, meager) and 'bakhshī' (bestowal, from bakhshīdan).
प्रयोग
In classical Urdu poetry, it is often employed by the poet to lament the beloved's or fate's miserly dispensation of grace.
उदाहरण
साक़ी की तुनुक-बख़्शी से रिंद प्यासे रह गए।
अब्र की तुनुक-बख़्शी ने चमन को बेचैन कर दिया।
समानार्थी
बुख़्लकंजूसीकम-अताई
संबंधित शब्द
तुनुक-मिज़ाजबख़्शिशफ़ैयाज़ी
