शब्दार्थ
तौक़
tauq
hinoun
अर्थ
गले का फंदा, बेड़ी या लोहे का पट्टा।
विस्तार
शाब्दिक रूप से यह लोहे का वह छल्ला या पट्टा है जो बंदियों अथवा दीवानों के गले में डाला जाता था। शास्त्रीय शायरी में यह बेबसी, प्रेम के बंधन और भाग्य की सख़्ती का रूपक है। प्रस्तुत शेर में शायर अपनी गर्दन को किसी तंग और दमघोंटू फंदे में जकड़ा हुआ पाता है।
व्युत्पत्ति
Arabic root ط-و-ق (ṭ-w-q), denoting a ring, collar, or yoke.
प्रयोग
Frequently paired with 'ज़ंजीर' in the compound idiom 'तौक़-ओ-ज़ंजीर' to signify absolute captivity or the helplessness of the stricken lover.
उदाहरण
तौक़-ए-ग़म से रिहाई मुमकिन न थी
गले में तौक़ और पाँव में ज़ंजीर
समानार्थी
गुलूबंदपट्टाशिकंजा
संबंधित शब्द
ज़ंजीरसलासिलबेड़ीहल्क़ा
