शब्दार्थ
ठहर
ṭhahar
hiverb
अर्थ
रुकना, टिकना, स्थिर होना या मन का शांत होना।
विस्तार
उर्दू शायरी में यह क्रिया ठहरने, टिकने अथवा दिल के शांत होने का भाव प्रकट करती है। प्रस्तुत शेर में 'जी ठहर जाए' का तात्पर्य जीवन या मन के स्थिर और सुरक्षित होने से है। यह अस्थिरता और स्थायित्व के द्वंद्व को रेखांकित करता है।
व्युत्पत्ति
Derived from Sanskrit 'स्तम्भ्' (stambh) through Prakrit, leading to the Hindavi root 'ṭhaharnā'.
प्रयोग
Commonly used in ghazals to depict the elusive hope of inner peace amidst perpetual emotional restlessness.
उदाहरण
इक दम भी दिल-ए-मुज़्तर ठहर नहीं पाता
आँखों में आँसू ठहर न सके
समानार्थी
रुकटिकसंभल
संबंधित शब्द
ठहरावठिकानाथिर
