शब्दार्थ
ठसक
Thasak
hinoun
अर्थ
नाज़-ओ-अंदाज़, नख़रेदार चाल, अकड़ या गर्व।
विस्तार
शायरी में 'ठसक' का प्रयोग महबूब की मस्तानी, नख़रीली और गर्वभरी चाल के लिए किया जाता है। इस शे'र में यह शब्द महबूब की उस क़यामत-ख़ेज़ और पुरवक़ार चाल को व्यक्त करता है जो दिलों में फ़ितना जगाती है। यह नाज़, शान और ऐंठ का एक मिला-जुला काव्यात्मक रूप है।
व्युत्पत्ति
Hindustani / Deshaj, an expressive or onomatopoeic formation conveying firmness, strike, and rhythmic strut.
प्रयोग
In the ghazal tradition, it is frequently paired with walking (चाल or ख़िराम) to portray the captivating arrogance and flirtatious pride of the beloved.
उदाहरण
गली से गुज़रे हैं वो किस ठसक के साथ
अदा में शौक़ भी है और वो ठसक भी है
समानार्थी
अकड़ऐंठशाननख़रा
संबंधित शब्द
मटकबांकपननाज़अंदाज़
