शब्दार्थ
जब्हा-साई
jabha-saa'ii
hinoun, feminine
अर्थ
माथा टेकना, सजदा करना, विनीत भाव से प्रार्थना।
विस्तार
इस सामासिक शब्द का अर्थ किसी की चौखट या भूमि पर अत्यंत दीनता और भक्ति से माथा रगड़ना अर्थात सजदा करना है। प्रस्तुत शे'र में यह महबूब के दर पर बरसों तक की गई निष्फल भक्ति और दीन-हीन याचना को व्यक्त करता है। यह प्रेम में समर्पण और उसके बदले उपेक्षा मिलने की व्यथा का प्रतीक है।
व्युत्पत्ति
Arabic 'jabha' (forehead) + Persian 'saa'i' (from 'saa-idan', to rub or scrape).
प्रयोग
Commonly used in ghazals to depict the lover's worshipful, desperate devotion at the beloved's threshold or the divine door.
उदाहरण
संगे-दर पर जब्हा-साई का यह सिला मिला
शौक़ में जब्हा-साई का सिलसिला न थमा
समानार्थी
सजदा-रेज़ीजबीं-साईमाथा-टेकना
संबंधित शब्द
जब्हाआस्ताँसजदानियाज़
