शब्दार्थ
जफ़ा-शआराँ
jafā-shi'ārāñ
hinoun
अर्थ
ज़ुल्म ढाने के आदी लोग; निष्ठुर प्रियतम।
विस्तार
शास्त्रीय शायरी में 'जफ़ा-शआराँ' का अर्थ ऐसे निष्ठुर माशूक़ हैं जो आशिक़ पर ज़ुल्म व सितम ढाने के आदी हों। फ़ारसी बहुवचन प्रत्यय '-आँ' के साथ यह सितमगरों के वर्ग को दर्शाता है। इस शेर में यह उन ज़ालिम महबूबों के लिए प्रयुक्त हुआ है जिनकी काली ज़ुल्फ़ों का ख़याल आशिक़ को तड़पाता रहता है।
व्युत्पत्ति
Compound of Arabic 'jafā' (cruelty/oppression) and Arabic 'shi'ār' (habit/nature), followed by the Persian plural suffix '-ān'.
प्रयोग
In the ghazal tradition, this epithet is frequently applied in the vocative or descriptive sense to beloveds notorious for tormenting faithful lovers.
उदाहरण
गिला क्या करें हम जफ़ा-शआराँ से।
जफ़ा-शआराँ की अंजुमन में वफ़ा की उम्मीद न रखो।
समानार्थी
सितमगरज़ालिमबे-रहमसितम-पेशा
संबंधित शब्द
जफ़ाशआरजफ़ा-जोजफ़ा-पेशा
