शब्दार्थ
जाँ-सोज़
jāñ-soz
hiadjective
अर्थ
जान जलाने वाला, अत्यंत दुखदाई, प्राणघातक कष्ट देने वाला।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'जाँ-सोज़' उस तीव्र पीड़ा, आह या शोक को दर्शाता है जो प्राणों को झुलसा दे। इस शे'र में यह शब्द आह और विलाप की जानलेवा जलन के लिए प्रयुक्त हुआ है, जिसे आशिक़ महज़ दिखावटी दर्द न मानकर दिल से उठा एक सर्वग्राही शो'ला बताता है। यह आंतरिक विरह और अत्यधिक आघात को प्रकट करता है।
व्युत्पत्ति
Persian compound formed from 'jān' (life, soul) and 'sōz' (present stem of sōkhtan, to burn).
प्रयोग
Commonly paired in the ghazal with words like 'āh' (sigh), 'nāla' (wail), or 'dard' (pain) to evoke the absolute limits of mortal suffering.
उदाहरण
जाँ-सोज़ तड़प ने आशिक़ की हर उम्मीद ख़ाक कर दी।
उसकी जाँ-सोज़ फ़रियाद सुनकर महफ़िल सन्न रह गई।
समानार्थी
रूह-फ़र्साजिगर-दोज़हसरत-ख़ेज़
संबंधित शब्द
जाँ-गुदाज़दिल-सोज़सोज़िशसोज़-ए-दिल
