शब्दार्थ
ज़ुल्मत-गुस्तरी
zulmat-gustarī
अर्थ
अंधेरा फैलाना, घोर तिमिर या उदासी का प्रसार।
विस्तार
यह सामासिक शब्द घने अंधकार और विरह की कालिमा के चहुँओर फैलने की अवस्था को दर्शाता है। प्रस्तुत शेर में यह आशिक़ के शबिस्ताँ (शयनकक्ष) के असीम तिमिर और एकाकीपन को अतिशयोक्ति के साथ व्यक्त करता है। यहाँ अंधेरे का फैलाव इतना गहरा है कि ज़रा सी रोशनी रुकते ही कमरा पूर्णतः अंधकारमय हो जाता है।
व्युत्पत्ति
A Persianate compound formed from Arabic 'zulmat' (darkness, gloom) and the Persian nominal derivative 'gustarī' (from 'gustardan', meaning to spread or scatter).
प्रयोग
In classical Urdu ghazal, the compound is employed as an elevated poetic device to intensify the interior desolation and existential gloom of the separated lover.
उदाहरण
शबिस्ताँ में ज़ुल्मत-गुस्तरी का आलम
रात की ज़ुल्मत-गुस्तरी और दिल की तन्हाई
