शब्दार्थ

ज़रूरत

zarūrat

hinoun (feminine)

अर्थ

आवश्यकता, हाजत या किसी चीज़ की दरकार।

विस्तार

शायरी में यह शब्द आवश्यकता, मजबूरी या किसी काम के औचित्य को दर्शाने के लिए प्रयुक्त होता है। इस शे'र में शेख़ के बाहरी दिखावे और पगड़ी के शमले पर तंज़ करते हुए पूछा गया है कि आख़िर इस व्यर्थ आडंबर की क्या ज़रूरत है।

व्युत्पत्ति

Arabic origin (ضرورة), derived from the root ض-ر-ر (ḍ-r-r), denoting necessity, compulsion, or exigency.

प्रयोग

In classical Urdu poetry, it frequently appears in interrogative rhetorical couplets (e.g., 'ज़रूरत क्या है') to scoff at worldly or ritualistic pretenses.

उदाहरण

ज़रूरत क्या थी यूँ महफ़िल में राज़-ए-दिल बयां करने की

हर एक ग़म ने हमें सब्र की ज़रूरत सिखाई

समानार्थी

हाजतएहतिहाजतलबमांग

संबंधित शब्द

ज़रूरीइज़तिरारज़रूरतन
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