शब्दार्थ

ज़रूर

zaroor

hiadjective

अर्थ

आवश्यक, अनिवार्य, लाज़िम या दरकार।

विस्तार

शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'ज़रूर' का प्रयोग प्रायः 'आवश्यक' या 'दरकार' के अर्थ में विशेषण के रूप में होता है। इस शे'र में 'ऐसा जीना हमें ज़रूर नहीं' का आशय है कि ऐसा जीवन हमें कतई स्वीकार्य या ज़रूरी नहीं है। यह प्रेमी के स्वाभिमान और बेपरवाही को दर्शाता है।

व्युत्पत्ति

Arabic root ḍ-r-r (ض-ر-ر), derived from 'ḍarūra' (necessity, compulsion, distress).

प्रयोग

In the classical ghazal, 'zaroor nahin' is a standard idiom signifying lack of need or poetic disdain toward an undesirable state.

उदाहरण

रुसवाई के साथ जीना हमें ज़रूर नहीं।

हर सितम को सहते रहना हमें ज़रूर नहीं।

समानार्थी

लाज़िमदरकारवाजिबअनिवार्य

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ज़रूरतज़रूरीइज़तिरा़र
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