शब्दार्थ

ज़ोम

zo'm

hinoun

अर्थ

घमंड, गर्व, अभिमान या झूठा गुमान।

विस्तार

शास्त्रीय उर्दू कविता में 'ज़ोम' (मूलतः ज़अम) का अर्थ झूठा घमंड, आत्ममुग्धता या अहंकार होता है। प्रस्तुत शेर में 'ज़ोम-ए-जुनूँ' का प्रयोग किसी व्यक्ति के अपनी दीवानगी या जुनून पर किए गए व्यर्थ के नाज़ को दर्शाने के लिए हुआ है। शायर ऐसे निरर्थक दंभ के सामने वाद-विवाद करने से परहेज़ करता है।

व्युत्पत्ति

Arabic root (ز-ع-م, z-ʿ-m), historically relating to asserting, claiming, or harboring a presumptuous belief.

प्रयोग

Commonly employed in ghazals to censure the arrogant self-righteousness of the preacher (zahid) or an excessively haughty beloved.

उदाहरण

ज़ोम-ए-पारसाई में मुब्तला रहना

हुस्न का ज़ोम किसी काम न आया

समानार्थी

गुरूरघमंडअहंकारनाज़

संबंधित शब्द

ज़ोम-ए-जुनूँपिंदारख़ुदीगुमान
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