शब्दार्थ

ज़िन्हार-वफ़ा

zinhaar-wafa

hinoun phrase

अर्थ

हरगिज़ वफ़ादारी, कभी भी निभाया जाने वाला प्रेम या वफ़ा

विस्तार

शास्त्रीय शायरी में 'ज़िन्हार' एक ताकीदी लफ़्ज़ है जिसका अर्थ 'कदापि', 'हरगिज़' या 'सावधान' होता है। इस शे'र में 'ज़िन्हार-वफ़ा' महबूब द्वारा कभी भी वफ़ा न किए जाने या वफ़ादारी के सर्वथा अभाव को ज़ोर देकर व्यक्त करता है। यह आशिक़ के दिल की अंतहीन सहनशीलता और माशूक़ की मुकम्मल बेवफ़ाई का तज़किरा करता है।

व्युत्पत्ति

Persian 'zinhār' (beware, by no means, never) + Arabic 'wafā' (fidelity, faithfulness, keeping faith).

प्रयोग

In classical Urdu ghazal, 'zinhaar' is frequently employed as an emphatic particle of negation or warning, reinforcing the lament of an unfaithful beloved.

उदाहरण

ज़िन्हार-वफ़ा की उम्मीद दिल को अब नहीं रही।

रस्म-ए-उल्फ़त में ज़िन्हार-वफ़ा नज़र न आई।

समानार्थी

हरगिज़-वफ़ाकामिल-वफ़ाअह्द-ए-वफ़ा

संबंधित शब्द

ज़िन्हारवफ़ाजफ़ाबे-वफ़ाई
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