शब्दार्थ
ज़ानू
zānū
hinoun, masculine
अर्थ
घुटना या जाँघ, जिस पर सिर टिकाया जाए।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू और फ़ारसी शायरी में 'ज़ानू' का अर्थ घुटना या जांघ होता है। यह अक्सर गहन दुख, मातम या एकांत चिंतन की उस मुद्रा की ओर संकेत करता है जिसमें व्यक्ति घुटनों पर सिर रखकर बैठता है ('सर-ब-ज़ानू')। इस शे'र में ग़ालिब व्यंग्यात्मक ढंग से कहते हैं कि यदि सिर धड़ से जुदा न हुआ होता, तो वह निरंतर दुख में घुटने पर ही टिका रहता।
व्युत्पत्ति
Persian 'زانو' (zānū), cognate with Sanskrit 'जानु' (jānu) and English 'knee'.
प्रयोग
In ghazal aesthetics, the knee is primarily invoked through idioms depicting the pensive posture of dejected lovers or disciples sitting respectfully.
उदाहरण
सर ब-ज़ानू बैठ कर ग़म का हिसाब करना
ज़ानू-ए-अदब तह कर के इल्म सीखना
समानार्थी
घुटनाजाँघ
संबंधित शब्द
सर-ब-ज़ानूज़ानू-ए-अदबज़ानू-ए-शौक़
