शब्दार्थ
जिधर
jidhar
hiadverb
अर्थ
जिस ओर, जिस तरफ़, जहाँ।
विस्तार
शास्त्रीय काव्य में 'जिधर' का प्रयोग सापेक्ष क्रियाविशेषण के रूप में 'जिस तरफ़' अथवा 'जहाँ' के अर्थ में होता है। प्रस्तुत शेर में यह 'तिधर' के साथ प्रयुक्त होकर माशूक़ की सर्वव्यापकता को दर्शाता है कि आशिक़ जहाँ कहीं भी देखता है, उसे केवल महबूब का ही नूर नज़र आता है। यह भाव सांसारिक प्रतीकों जैसे फूल और चाँद की तुलना में प्रेमास्पद के सौंदर्य की सर्वोच्चता को रेखांकित करता है।
व्युत्पत्ति
From Sanskrit यतः (yataḥ) through Prakrit and Apabhramsha into Old Hindi/Hindavi.
प्रयोग
In classical ghazal, 'jidhar' is frequently paired with 'tidhar' or 'udhar' to construct parallelism emphasizing the omnipresence of divine beauty or pervasive grief.
उदाहरण
जिधर देखता हूँ तेरी ही दास्ताँ है
गए थे जिधर को वहीं रुक गए क़दम
समानार्थी
जिस तरफ़जिस ओरजहाँ
संबंधित शब्द
तिधरउधरकिधरइधर
