शब्दार्थ
ज़ात
zāt
अर्थ
मूल अस्तित्व, वास्तविक स्वरूप, परम सत्य या परमात्मा की हस्ती।
विस्तार
सूफ़ी दर्शन और शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'ज़ात' ईश्वर के मूल और गूढ़ अस्तित्व को दर्शाता है, जिसे 'सिफ़ात' (गुणों) के मुक़ाबले में देखा जाता है। इस शेर में इसका अर्थ परम सत्य और ईश्वरीय मूल स्वरूप है, जिसकी अनुभूति में आरिफ़ (ज्ञानी) हमेशा मस्त रहता है। सामान्य भाषा में यह व्यक्ति के मूल वजूद या जाति के अर्थ में भी प्रयुक्त होता है।
व्युत्पत्ति
Arabic ذات (dhāt), originally the feminine of ذو (dhū, 'possessor of'), later evolving in philosophical and theological thought to mean 'essence' or 'entity'.
प्रयोग
In the ghazal tradition, 'zāt' is frequently juxtaposed with 'sifāt' to explore mystical paradoxes concerning the transcendent vs. immanent nature of God.
उदाहरण
सिफ़ात के पर्दे में छुपी है ज़ात-ए-हक़।
अपनी ज़ात की पहचान ही असल मारिफ़त है।
