शब्दार्थ

जिगर-सोख़्ता

jigar-sokhta

hiadjective

अर्थ

दुखी, शोकग्रस्त या अत्यंत व्याकुल हृदय वाला व्यक्ति।

विस्तार

इसका शाब्दिक अर्थ 'जले हुए जिगर या कलेजे वाला' है, जो गहरे शोक और विरह की पराकाष्ठा को दर्शाता है। शास्त्रीय काव्य में जिगर को धीरज और तीव्र पीड़ा का केंद्र माना जाता है, अतः उसका जलना जीवन के क्षीण होने का प्रतीक है। प्रस्तुत शेर में यह शब्द मीर के लिए विशेषण के रूप में आया है, जो विरह में जलकर बुझने वाले चराग़ की तरह मरणासन्न हैं।

व्युत्पत्ति

Persian compound of 'jigar' (liver/seat of deep feeling) and 'sōkhtah' (burnt, past participle of sōkhtan, to burn).

प्रयोग

Widely used in the classical ghazal to portray the afflicted lover whose vital spirit is consumed by the fire of passion.

उदाहरण

आह इस जिगर-सोख़्ता की महफ़िल जला न दे

पुर्सिश-ए-हाल-ए-जिगर-सोख़्ता लाज़िम ठहरी

समानार्थी

दिल-जलासोज़ाँग़म-दीदाआफ़त-ज़दा

संबंधित शब्द

जिगरसोख़्तासोज़-ए-जिगरख़ून-ए-जिगर
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