शब्दार्थ
ज़ख़्म-रसा
zakhm-rasā
hinoun
अर्थ
गहरा या आर-पार घाव, दिल तक पहुँचने वाला कारे ज़ख़्म।
विस्तार
शास्त्रीय शायरी में 'ज़ख़्म-रसा' का आशय ऐसे गहरे और कारे घाव से है जो सीने या दिल के आर-पार हो जाए। प्रस्तुत शे'र में इसका प्रयोग महबूब के उस गहरे प्रहार के लिए हुआ है जिसने आशिक़ के सीने को चाक और दिल को चकनाचूर कर दिया।
व्युत्पत्ति
Persian compound formed from 'zakhm' (wound, cut) and 'rasā' (reaching, penetrating, from rasīdan).
प्रयोग
Frequently invoked in the ghazal tradition to describe the deep, exquisite, yet deadly emotional wounds wrought by the beloved's glance.
उदाहरण
इश्क़ का ज़ख़्म-रसा
ज़ख़्म-रसा से छलनी सीना
समानार्थी
कारे-ज़ख़्मगहरा घावज़ख़्म-ए-जिगर
संबंधित शब्द
ज़ख़्मरसाज़ख़्म-ए-कारीफ़िगार
