शब्दार्थ
ज़-ख़ुद-रफ़तगी
zi-khud-raftagī
hinoun
अर्थ
आत्म-विस्मृति, सुध-बुध खोने की अवस्था, बेख़ुदी या तन्मयता।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'ज़-ख़ुद-रफ़तगी' का अर्थ स्वयं से विलग हो जाना या सुध-बुध खो बैठना है। मीर के इस शे'र में यह आशिक़ की उस दीवानगी और बेख़ुदी की रात को दर्शाता है जब दिल के काबू में न होने के कारण वह निरंतर बेचैनी और प्रतीक्षा में भटकता रहा।
व्युत्पत्ति
Persian: compound of 'zi' (from, out of) + 'khud' (self) + 'raftagī' (departure, vanishing, from raftan 'to go').
प्रयोग
Commonly used in ghazals to evoke the mystic or romantic trance where the lover's ego dissolves under emotional agony or ecstatic vision.
उदाहरण
आशिक़ रात भर ज़-ख़ुद-रफ़तगी के आलम में तड़पता रहा।
ज़-ख़ुद-रफ़तगी ने उसे दुनिया के सारे ग़म भुला दिए।
समानार्थी
बे-ख़ुदीबे-होशीआत्म-विस्मृति
संबंधित शब्द
ख़ुद-रफ़्ताबे-ख़ुदीसर-शारीमहवियत
