शब्दार्थ

जाँ-काहीयाँ

jāñ-kāhiyāñ

hinoun (feminine plural)

अर्थ

प्राण सुखाने वाले कष्ट, असह्य यातनाएँ या घोर पीड़ाएँ।

विस्तार

यह शब्द उन असह्य पीड़ाओं और यातनाओं को दर्शाता है जो प्राणों को सुखा देती हैं और शरीर तथा मन को क्षीण कर देती हैं। प्रस्तुत शेर में शायर का आशय अपनी उन आत्मघाती तकलीफ़ों से है जिन्हें महबूब ने बहुत मामूली समझ लिया। यह इश्क़ की उस निरंतर जलने और पिघलने वाली व्यथा को व्यक्त करता है।

व्युत्पत्ति

Persian compound: 'jān' (soul, life) + 'kāh' (stem of kāhīdan, to diminish/waste away) + abstract noun suffix '-ī' + plural suffix '-āñ'.

प्रयोग

In classical ghazal, 'jāñ-kāhī' frequently illustrates the relentless, slow-consuming emotional torment born of longing, unrequited love, and destiny.

उदाहरण

राह-ए-इश्क़ की जाँ-काहीयाँ

फ़िराक़ की जाँ-काहीयाँ सहना

समानार्थी

तकलीफ़ेंमुसीबतेंयातनाएँसख़्तियाँ

संबंधित शब्द

जाँ-काहजाँ-सोज़जाँ-गुज़ा
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