शब्दार्थ
जाँ-काही
jaan-kaahi
hinoun, feminine
अर्थ
प्राण या जीवन को क्षीण करने वाला कष्ट।
विस्तार
'जाँ-काही' का अर्थ है प्राणों को धीरे-धीरे क्षीण और खोखला कर देने वाली अत्यंत पीड़ा। प्रस्तुत शे'र में यह मर्ज़ की उस जानलेवा थकावट और व्याकुलता को दर्शाता है जो जीवन को सुखा देती है। शायरी में इसका प्रयोग अक्सर असाध्य बीमारी या प्रेम के असह्य विरह के लिए किया जाता है।
व्युत्पत्ति
Persian compound formed from 'jān' (life, soul) and 'kāhī' (abstract noun from the verb 'kāhīdan', meaning to diminish, waste away, or consume).
प्रयोग
In classical Urdu poetry, 'jaan-kaahi' is typically invoked in contexts of relentless love-grief or fatal illness to emphasize an agonizing, gradual wasting away of the spirit.
उदाहरण
हिज्र की जाँ-काही
जाँ-काही-ए-ग़म का अफ़साना
समानार्थी
जाँ-गुदाज़ीजाँ-सोज़ीप्राण-घातकता
संबंधित शब्द
जाँ-काहजाँजाँ-ब-लब
