शब्दार्थ
ज़ौक़
Zauq
hinoun, masculine
अर्थ
स्वाद, रुचि, आनंद या देखने-सराहने का चाव।
विस्तार
शास्त्रीय शायरी में 'ज़ौक़' का अर्थ केवल ज़ुबान का स्वाद नहीं बल्कि सौंदर्यबोध, हार्दिक आनंद और गहरा चाव है। इस शेर में यह 'ज़ौक़-ए-तमाशा' के रूप में आया है, जिसका अर्थ सृष्टि के सौंदर्य को देखने और अनुभव करने का परमानंद है। यह एक ऐसी नज़र की मांग करता है जो अस्तित्व के हर रंग को देखने के लिए तत्पर रहे।
व्युत्पत्ति
Arabic (ذَوْق - dhawq), meaning taste, savor, or aesthetic discernment.
प्रयोग
Commonly invoked in ghazals to signify mystic perception, emotional longing, or an exquisite appetite for witnessing divine and earthly beauty.
उदाहरण
ज़ौक़-ए-दीदार ने बेचैन कर रखा है।
उन्हें शेर-ओ-सुख़न का बड़ा आला ज़ौक़ है।
समानार्थी
शौक़रुचिलत्फ़सरूर
संबंधित शब्द
ज़ौक़-ए-तमाशाज़ौक़-ए-दीदज़ौक़-ए-शायरी
