शब्दार्थ
जां
Jaañ
hinoun
अर्थ
प्राण, जीवन, रूह अथवा अत्यंत प्रिय व्यक्ति।
विस्तार
उर्दू शायरी में 'जां' का आशय प्राण, आत्मा या जीवन-शक्ति से होता है। इस शे'र में प्रयुक्त 'रग-ए-जां' (जीवन की नस या शाह-रग) अस्तित्व के उस अत्यंत गहरे और नाज़ुक मर्म को व्यक्त करता है जहाँ महबूब की नज़र का नश्तर सीधे पैबस्त हो गया है।
व्युत्पत्ति
Persian (جان, jān), from Middle Persian gyān (soul, life), ultimately of Proto-Iranian origin.
प्रयोग
A staple of classical ghazal, used both literally for vital life and figuratively as an endearment for the beloved.
उदाहरण
रग-ए-जां में उतर गया दर्द-ए-जुदाई।
राहे-उल्फ़त में अपनी जां निसार कर दी।
समानार्थी
प्राणरूहहयातज़िंदगी
संबंधित शब्द
रग-ए-जांजानांजां-निसारजान-ओ-दिल
