शब्दार्थ

छपे

chhupe

hiVerb

अर्थ

छिपे रहना, गुप्त रहना या ओझल होना।

विस्तार

शास्त्रीय काव्य में इसका अर्थ नज़र से ओझल या गुप्त रहना है। इस शे'र में यह भाव प्रकट किया गया है कि चौदहवीं के चाँद जैसे हसीन माशूक़ का इश्क़ किसी तरह छुप नहीं सकता और आख़िरकार शहर भर में ज़ाहिर हो ही जाता है।

व्युत्पत्ति

Sanskrit kshap/chhap (क्षप्यते/छप्पइ) through Prakrit into Hindustani chhipnā/chhupnā.

प्रयोग

A frequent motif in ghazals dealing with the paradox of wanting to safeguard the mystery of love while its intensity inevitably betrays the lover.

उदाहरण

इश्क़ का राज़ कभी लाख छुपाए न छपे

वो निगाहों से छपे दिल में मगर रहते हैं

समानार्थी

छिपेपोशीदापिन्हाँमख़फ़ी

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छुपनाछुपानापर्दारुसवाई
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