शब्दार्थ
छालों
chhāloñ
hinoun, masculine plural (obliqu
अर्थ
फफोलों, पैरों या त्वचा पर उभरे आबलों
विस्तार
शास्त्रीय शायरी में 'छाले' (आबले) आशिक़ के नंगे पैरों में सहरा के काँटों पर भटकने से पड़ने वाले फफोलों का प्रतीक हैं। इस शेर में यह उन छालों को दर्शाता है जिनमें चुभे काँटों को सुई की नोक से निकाला जा रहा है ताकि दर्द की लज़्ज़त बनी रहे। यह आशिक़ के उस मिज़ाज को दर्शाता है जो पीड़ा के उपचार में भी दर्द का आनंद खोजता है।
व्युत्पत्ति
Derived from Sanskrit 'स्फोट' (sphoṭa) or Prakrit 'छल्ल' (chhalla), yielding Hindi/Urdu 'छाला'.
प्रयोग
A stock motif in ghazal poetry, often linked with thorns (khār) and wandering (dasht-navardi) to signify the physical cost of boundless love.
उदाहरण
सहरा के सफ़र में पैरों के छालों का फूट पड़ना
काँटों की चुभन से छालों का भर जाना
समानार्थी
आबलोंफफोलोंज़ख़्मों
संबंधित शब्द
छालाकाँटेआबला-पासोज़न
