शब्दार्थ
चराग़
charāgh
hinoun, masculine
अर्थ
दीपक, दीया, ज्योति या रोशनी का स्रोत।
विस्तार
शास्त्रीय शायरी में 'चराग़' दीये और प्रकाश का रूपक है, जो अक्सर प्रतिकूल हवाओं के सामने जलता रहता है। इस शेर में 'चराग़-ए-रौशन' से आशय आशिक़ की उस प्रज्वलित रूह और चेतना से है जो विपत्तियों के तूफ़ानी सागर में भी बुझने के बजाय मूँगे की तरह निखरती है। यह पीड़ा और संघर्ष के बीच जीवित रहने वाली आंतरिक चमक का प्रतीक है।
व्युत्पत्ति
Persian (چراغ), denoting an oil lamp or light source.
प्रयोग
In the ghazal tradition, 'charagh' is most frequently juxtaposed with 'hawa' (wind) or 'sarsar' (stormy gale) to dramatize fragile existence confronting fate.
उदाहरण
शाम ढले मज़ार पर जलता हुआ चराग़
चराग़-ए-सहर की मानिंद बुझती हुई लौ
समानार्थी
दीपकशमादियासिराज
संबंधित शब्द
चराग़ाँचराग़-ए-सहररौशनीलौ
