शब्दार्थ
चाह
chaah
hiverb
अर्थ
चाहना, इच्छा करना (यहाँ आज्ञार्थक रूप में 'मत चाह')।
विस्तार
उर्दू और हिंदी शायरी में 'चाह' का प्रयोग संज्ञा (इच्छा, प्रेम) और क्रिया 'चाहना' के आज्ञार्थक रूप दोनों प्रकार से होता है। इस शेर में यह 'न चाह' के रूप में प्रयुक्त हुआ है, जिसका अर्थ है 'ऐसा मत चाह' या 'ऐसी इच्छा न कर'। आशिक़ महबूब से गुज़ारिश करता है कि वह उसे उसके अपने ही गुमान से लज्जित देखना पसंद न करे।
व्युत्पत्ति
Prakrit 'चाहइ' (cāhaï), ultimately traced to Sanskrit 'चाय्' (cāy, to perceive, respect) or related to roots of desire/seeking.
प्रयोग
Commonly used in classical ghazal to denote both genuine romantic yearning and the act of commanding or imploring the beloved.
उदाहरण
दिल-ए-बर्बाद की रुस्वाई न चाह।
आशिक़ तिरे दीदार के सिवा कुछ न चाहे।
समानार्थी
इच्छा करनातलब करनाआरज़ू करना
संबंधित शब्द
चाहनाचाहतबे-चाह
